मंत्र और प्रार्थना

शांति पाठ — सबके कल्याण की प्रार्थना

पूजा के अंत में पढ़ी जाने वाली चार पंक्तियां, जो केवल अपने नहीं, सबके सुख और स्वास्थ्य की कामना करती हैं।

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

अर्थ

सभी सुखी हों, सभी निरोग हों, सभी का कल्याण हो, कोई दुःख का भागी न बने। शांति, शांति, शांति।

कहां पढ़ा जाता है

पूजा, पाठ, हवन और अनेक कक्षाओं के अंत में। तीन बार "शांति" तीन प्रकार के तापों के लिए कही जाती है — शारीरिक, आसपास के संसार से आने वाले, और जो हमारे हाथ से परे हैं — इसीलिए यह शब्द एक बार नहीं, तीन बार बोला जाता है।

इसमें अपने लिए कुछ नहीं मांगा गया। यही इसका भाव है।

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